## **अमेठी: जनगणना प्रशिक्षण में 'बदबूदार' भोजन पर भड़के शिक्षक, लंच पैकेट लौटाकर जताया कड़ा विरोध**
अमेठी के जामो ब्लॉक से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ देश की महत्वपूर्ण **जनगणना (Census)** के लिए प्रशिक्षण लेने आए शिक्षकों और कर्मचारियों को कथित तौर पर खराब और दुर्गंधयुक्त भोजन परोसा गया। खाने की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि शिक्षकों ने इसे लेने से साफ मना कर दिया और लंच पैकेट वापस कर अपना विरोध दर्ज कराया।
### **क्या है पूरा मामला?**
भारत सरकार के निर्देशों के तहत जल्द ही जनगणना का कार्य शुरू होना है। इसी सिलसिले में जामो ब्लॉक सभागार में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था। दोपहर के समय जब प्रतिभागियों को लंच पैकेट बांटे गए, तो हॉल में हंगामा शुरू हो गया।
* **शिक्षकों का आरोप:** पैकेट खोलते ही उसमें से तेज दुर्गंध आ रही थी।
* **स्वास्थ्य का खतरा:** शिक्षकों का कहना है कि ऐसा खाना खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा हो सकता था।
* **सामूहिक बहिष्कार:** विरोध स्वरूप अधिकांश कर्मचारियों ने पैकेट वापस कर दिए और उचित व्यवस्था की मांग की।
> "भोजन की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की थी। स्वास्थ्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन को दोषी ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।"
> — **राम नंद द्विवेदी, शिक्षक**
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### **प्रशासनिक कार्रवाई और जांच**
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी (SDM) **प्रीति तिवारी** ने तत्काल संज्ञान लिया है। प्रशासन ने इस घटना पर निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
1. **तहसीलदार को जांच के निर्देश:** पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
2. **सैंपल टेस्टिंग:** भोजन के पैकेट को जांच के लिए लैब भेजा गया है।
3. **वेंडर पर कार्रवाई की तैयारी:** यदि जांच में भोजन दूषित पाया जाता है, तो संबंधित वेंडर का कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
### **वेंडर की लापरवाही पर उठे सवाल**
हैरानी की बात यह है कि इसी वेंडर ने अन्य ब्लॉकों में भी भोजन की सप्लाई की थी, लेकिन शिकायत केवल जामो ब्लॉक से मिली। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या केवल इसी ब्लॉक के लिए बासी या खराब खाना भेजा गया था? शिक्षक **ओम नारायण पांडे** ने भी इस अव्यवस्था पर नाराजगी जाहिर करते हुए भविष्य में बेहतर प्रबंध सुनिश्चित करने की बात कही है।
**निष्कर्ष:**
जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में जुटे कर्मियों के साथ इस तरह की लापरवाही प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाती है। अब देखना यह है कि जांच के बाद दोषी ठेकेदार पर क्या कार्रवाई होती है।
**आपकी क्या राय है? क्या सरकारी आयोजनों में भोजन की गुणवत्ता की पहले जांच नहीं होनी चाहिए? कमेंट में बताएं।**
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